प्राचीन मुख्य मड़वारानी दाई मंदिर (पहाड़ ऊपर)

धर्म संसार

  • Home
  • धर्म संसार

नवदुर्गा की पौराणिक कथा

माँ मडवारानी दाई की कल्पवृक्ष मे जवा अपने आप उगने तथा माँ को विभिन्न रुप मे मडवारानी पहाड़ के नीचे स्थित ग्राम के चरवाहों और किसानों को दर्शन मिलने तथा माताजी द्वारा सुन्दर कन्या रुप धारण कर और शेर पर सवार होकर भ्रमण करने की जानकारी मिलने लगी।

मड़वारानी दाई की महिमा एवं अपार श्रध्दा के कारण तराई के सभी ग्रामों में मड़वारानी दाई की पुजा अर्चना धुम धाम से होती है इस कारण ग्राम कोथारी, बरपाली, सरगबुंदिया की एवं आस-पास के बहुत से ग्राम में माता मड़वारानी दाई की मंदिर निर्माणकर मड़वारानी दाई को स्थापित करके प्रतिदिन पुजा अर्चना करते है। माँ मड़वारानी के पावन स्थल पूर्णतः जंगलपर स्थित है। वर्तमान में वर्तमान पहाड के नीचे वाले सभी गांवों में पक्की सड़क, हेण्ड पंप, बिजली, स्कूल, के लिए रकम की व्यवस्था हो गई तथा पहाड़ के तरफ नीचे रोड पक्की-कच्ची स्थित है।

नवदुर्गा की पौराणिक कथा

माँ मडवारानी दाई की कल्पवृक्ष मे जवा अपने आप उगने तथा माँ को विभिन्न रुप मे मडवारानी पहाड़ के नीचे स्थित ग्राम के चरवाहों और किसानों को दर्शन मिलने तथा माताजी द्वारा सुन्दर कन्या रुप धारण कर और शेर पर सवार होकर भ्रमण करने की जानकारी मिलने लगी।

मड़वारानी दाई की महिमा एवं अपार श्रध्दा के कारण तराई के सभी ग्रामों में मड़वारानी दाई की पुजा अर्चना धुम धाम से होती है इस कारण ग्राम कोथारी, बरपाली, सरगबुंदिया की एवं आस-पास के बहुत से ग्राम में माता मड़वारानी दाई की मंदिर निर्माणकर मड़वारानी दाई को स्थापित करके प्रतिदिन पुजा अर्चना करते है। माँ मड़वारानी के पावन स्थल पूर्णतः जंगलपर स्थित है। वर्तमान में वर्तमान पहाड के नीचे वाले सभी गांवों में पक्की सड़क, हेण्ड पंप, बिजली, स्कूल, के लिए रकम की व्यवस्था हो गई तथा पहाड़ के तरफ नीचे रोड पक्की-कच्ची स्थित है।

 

ज्योति कलश