प्राचीन मान्यता है कि मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीरामचन्द्र जी के छत्तीसगढ़ अंचल के वनागमन के समय उनके अनुज भ्राता भरत अपनी पत्नी मांडवी के साथ श्रीरामजी से मिलने आये थे। साथ में उनकी पत्नी मांडवी आयी थी। मांडवी शब्द आगे चलकर मड़वारानी के ग्राम से प्रसिद्ध हो गया था।
इससे प्रभावित पुरातन काल में छत्तीसगढ़ अंचल के निवासियों के द्वारा माता मड़वारानी के मंदिर की स्थापना की गयी। माँ मड़वारानी के निरंतर स्मरण, चिंतन, दर्शन से मानव समुदाय मुक्ति की ओर अग्रसर होगा।
इसलिए उक्त पावन पर्वत पर श्रद्धा-भक्ति के साथ सपरिवार सहित आइये एवं आदिशक्ति माँ मड़वारानी दाई के दर्शन कर अपने मनुष्य जीवन को धन्य व सफल बनाईये।