आदिशक्ति पर्वत वासिनी के पावन स्थल जो माता की कृपा से विराजमान है, शक्तिमान है। जो भी माता के स्थल पर पहुँच कर सच्चे मन से नमन करता है, माता उसकी जरूर मनोकामना को पूर्ण करती हैं।
जिसके कारण आस-पास के लोगों के साथ ही दूर-दूर तक यह स्थल कई विश्वास का केन्द्र है एवं आस्था के प्रतीक है, जहाँ पूरे भारतवर्ष में दूर-दूर से श्रद्धालुगण आते हैं एवं मनोकामना ज्योति कलश प्रज्ज्वलित कराते हैं।
प्राचीन समय में माता की कृपा से हर नवरात्रि पर्व के पंचमी में नवरात ज्वारा उस समय के कल्पवृक्ष (कलमी) के तना एवं डाल तथा पत्ता-पत्ता में अपने आप ज्वारा प्रकट होती थी तथा तिथि तेरस पड़ती थी के पश्चात ज्वारा अपने आप विलुप्त हो जाती थीं।
कालांतर में उक्त कल्पवृक्ष के नष्ट होने पर उक्त स्थल में माता जी का वास स्थल होने के कारण मड़वा छाकर माता का पर्व पर पूजा-अर्चना की जाती रही है। आज वहाँ पर मंदिर का निर्माण 1969 से किया गया है एवं समिति द्वारा उक्त मंदिर का जीर्णोद्धार करते हुए माताजी का विशाल मंदिर का निर्माण किया जा रहा है।
जो वर्तमान में निर्माणाधीन है, छत स्तर तक का कार्य हो चुका है तथा नीचे शिखर बना हुआ है। यदि इस स्थल को दूर-दूर, प्रदेश तथा अन्य प्रदेशों से भक्तगण माता के दर्शन करने आते हैं, जिसके लिए उन्हें दुर्गम पहाड़ी स्थल रास्ता से पैदल या वाहन से 06 किलोमीटर आना पड़ता है, जो कच्ची रोड बनी है एवं बरसात में कट जाती है एवं रास्तों में कभी जानवर जैसे भालू, हिरण, शूकर विचरण करते हैं, जिनके द्वारा किसी भी प्रकार के आदमी को अभी तक नुकसान नहीं पहुँचाई गई है।
यदि उक्त स्थल में जाने के रास्तों में पीने का पानी एवं रोड वाली तथा प्रतीक्षालय बीच-बीच में बनवा दिया जावे तो वनाच्छादित होने के कारण शक्तिपीठ के रूप में सिद्ध पावन स्थल होगी। इस पर सकारात्मक पहल किये जाने की आवश्यकता है।
पुराने समय में बरपाली में बाजार बैठता था वहाँ से चुहरी जाने का रास्ता है। चुहरी में पानी का स्रोत है जहाँ पानी हमेशा मिलता है, जहाँ पर भैसामुड़ा, सन्डैल, कुररीहा के लोग चुहरी होकर माता के स्थान पर जाते हैं। उसके अलावा और रास्ता कुररीहा से नहीं है।
कुररीहा एवं झिका मड़वारानी पहाड़ के नीचे स्थित हैं जहाँ से सीधा जाने का रास्ता नहीं है। पहाड़ से नीचे सीधे खाई है, उसके बाद बस्ती बसा है। बस्ती के नीचे हसदेव नदी अपने करतल स्वर प्रवाहित होते चले आ रही है। माता मड़वारानी दाई के चरणों को धोकर प्रणाम कर रही है।
प्राचीन समय में घने जंगल था। कंटीले रास्ते में बड़े-बड़े नाला था जिसके आवागमन दुर्गम था। पगडंडी रास्ता एवं अंदाजा रास्ता अपनाकर चलना पड़ता था। कालांतर में माता की कृपा से माता के स्थल को संधारण करने के लिए समय-समय पर आस-पास के ग्रामीणों की समूह एवं पुजारी बैगा द्वारा सभी मिलकर माता के द्वारा चरवाहा एवं आम लोगों को दिए सपने के अनुरूप पूजा-पाठ करते चले आ रहे हैं।
वर्तमान में माता के श्रद्धालु भक्त के आने-जाने के लिए सीढ़ी, रास्ता, कच्ची-पक्की रोड, बिजली की व्यवस्था, मंदिर एवं स्थल का नवनिर्माण किया गया है। तथा मड़वारानी दाई के प्राचीन मंदिर का जीर्णोद्धार एवं नव निर्माण कार्य प्रगति पर है।
वर्तमान में माँ मड़वारानी सेवा एवं जनकल्याण समिति पंजीयन क्रमांक 368 वि.सं., जिला कोरबा का गठन कर समिति के द्वारा माता की कृपा से पैदल चलने के रास्ते कच्ची रोड का निर्माण जन सहयोग एवं शासन के कुछ सहयोग से किया गया है। जिसमें नीचे मड़वारानी से पहाड़ ऊपर जाने का रास्ता का निर्माण किया गया। समिति के सचिव श्री विनोद साहू के नेतृत्व में पूर्व मंत्री श्री मेघाराम साहू से सम्पर्क कर माता के दर्शन हेतु श्रद्धालुओं की व्यवस्था माता की कृपा से की। मेघाराम साहू ने मुख्यमंत्री रमन सिंह से घोषणा आम सभा में कराया गया। जिसके परिणामस्वरूप 01 किलोमीटर सी.सी. का निर्माण हुआ तथा पीने के पानी की व्यवस्था के घोषणा पर पाइप लाइन बिछाकर कुछ दूरी तक पानी की व्यवस्था किया गया है।
शासन के सहयोग से समिति के पूर्व संरक्षक श्री पिताम्बर कंवर द्वारा एवं पहाड़ ऊपर हैंडपंप बोर खुदाई का कार्य कराया गया जहाँ बोर से कम मात्रा में पानी मिलता रहता है।
मंदिर के पूर्व में पुजारी छत्तू भगत द्वारा जन सहयोग से सीढ़ी का निर्माण कराया था तथा थीपा पानी को इकट्ठा कर लोगों को पीने के पानी की व्यवस्था के लिए स्थान को बनवाया था।
कोरबा निवासी श्री के.एन. सिंह ने चुहरी से पहाड़ ऊपर जाने के लिए रास्ते पर सीढ़ी का निर्माण कराया है तथा मड़वारानी नीचे से पहाड़ ऊपर जाने के कच्ची रोड पर माँ मड़वारानी सेवा एवं जनकल्याण समिति द्वारा श्री संतोष सोनी की माता श्रीमती चन्द्रकली सोनी की स्मृति में हनुमान मंदिर का निर्माण किया गया है, जिसमें श्री दुखीराम निषाद जी का विशेष सहयोग रहा एवं माता मड़वारानी दाई के पावन स्थल पर राम मंदिर का निर्माण हुआ है।
माता मड़वारानी दाई के पावन स्थल पर श्री गोपीराम ने मंदिर बनवाया था एवं श्री शिवप्रसाद साहू ने एक-एक स्थान पर मंदिर का निर्माण कराया था जो पूर्व में छोटा था, जिसे माँ मड़वारानी सेवा एवं जनकल्याण समिति मड़वारानी पंजीयन क्रमांक 368 ने बड़े रूप में परिवर्तित किया है।
एवं वर्तमान में गोगीराम एवं अन्य श्रद्धालुओं द्वारा निर्मित मंदिर परिसर को माँ मड़वारानी दाई की कृपा से समिति के माध्यम से माता की कृपा पर भव्य रूप में निर्मित किया जा रहा है। जहाँ माता के नवरात्र पर्व पर ज्योति कलश मनोकामना प्रज्ज्वलित होता है। जिसका विसर्जन हसदेव नदी एवं सोन नदी में दोनों स्थान पर करते हैं।
इस प्रकार से माँ मड़वारानी दाई के पावन स्थल मड़वारानी पहाड़ ऊपर स्थित है, जहाँ उसके तराई में बसे सभी ग्रामों की जनता की आराध्य देवी है, जहाँ प्राकृतिक छटा, चारों ओर हरियाली दिखाई देती है।
भौगोलिक रूप से गूगल में मड़वारानी दाई के पावन स्थल मंदिर एवं आवागमन की रास्ता परिलक्षित होती है, जहाँ वर्तमान में रेलवे स्टेशन मड़वारानी दाई के नाम पर बना है तथा मड़वारानी पहाड़ के नीचे बसे ग्राम खरहरी को अब मड़वारानी के नाम से जाना एवं पहचाना जाता है।
माता की कृपा से मुख्य मार्ग पर मड़वारानी दाई की मंदिर स्थापित किया गया है जो पहाड़ चढ़ने में परेशानी एवं रास्ता का अभाव था, इस कारण स्थापित किया गया है।